International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 1, Issue 1 (2015)

जीवन कौशल के विकास में शिक्षक एंव शिक्षण संस्थाओं की भूमिका

Author(s): डाॅ0 प्रज्ञा अग्रवाल
Abstract: शिक्षा के द्वारा हमें अपने बेहतर उत्तरदायित्व का बोध होता है जहाँ हम देश की सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, भौगोलिक, ऐतिहासिक आदि स्थितियों का अध्ययन करते हैं, वहीं पर नित नये-नये वैज्ञानिक आविष्कारों की जानकारी प्रापत होती रहती है। इन आविष्कारों को हम शिक्षा के माध्यम से देश और समाज को अवगत कराते रहते हैं। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि हमें अब पाठ्यक्रम में सूचनापरक ज्ञान की अपेक्षा अभिवृत्तियों, मूल्यों, आस्ािाओं, दक्षताओं कौशलों आदि के विकास पर बल देना चाहिए। वर्तमान युग प्रतियोगिता का है इस युग मे प्रत्येक व्यक्ति योग्यता के पैमाने पर एक समान मिलेगा ऐसा संभव नहीं है जिस योग्यता के आधार पर एक व्यक्ति को दूसरे से अलग किया जा सकता है वह है (कौशल) यानि गुणवत्ता, प्रेरणा, उत्साह और नेतृत्व की क्षमता। अध्यापकों में भी उन कौशलों को विकसित करने की आवश्यकता है जिससे विद्यार्थियों में कौशल निर्माण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके, विद्यालयी शिक्षा शिक्षार्थी के बहुआयामी व्यक्तित्व के विकास में सहायक होती है। वह ज्ञान संकल्पना मूल्य एवं कौशलों पर आधारित होती है जिसके द्वारा न केवल बौद्धिक विकास होता है अपितु शारीरिक, मनोवैज्ञानिक तथा सामाजिक विकाय भी होता है।
Pages: 31-33  |  1590 Views  656 Downloads
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