International Journal of Hindi Research

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Vol. 2, Issue 3 (2016)

भारत एवं उत्तर प्रदेश के राजनितिक परिपेक्ष में महिलाओं की स्थिति की विवेचना


प्रशांत कुमार

प्राचीन काल से आधुनिक काल यानि वर्तमान समय तक भारत में स्त्रियों की स्थिति परिवर्तनशील रही है| हमारा समाज प्राचीन काल से आज तक पुरुष प्रधान ही रहा है | विश्व का इतिहास और विश्व के प्रगतिशील देशों की राजनीति, सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति इस बात का प्रमाण है कि किसी भी देश की वांछित प्रगति के लिए उस देश की महिलाओं की भागीदारी आवश्यक एवं महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्रसंघ की महासभा द्वारा घोषित ‘‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला वर्ष’’ एवं ‘‘महिला दशक 1990-2000’’ की समाप्ति तक भी भारत की सम्पूर्ण कार्यात्मक शक्ति में महिला कार्यकर्ताओं की संख्या कम है। विश्व की आधी शक्ति एवं क्षमता होने के बावजूद राजनीतिक, सामाजिक आर्थिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में महिलाओं की भूमिका, उनकी कम भागीदारी तथा कमजोर स्थिति और सहभागिता पर प्रश्नचिन्ह यथावत लगा हुआ है। भारतीय राजनीति में महिलाओं के लिए किसी प्रकार का प्रतिबन्ध न होने के बावजूद भी वे भारत के आम चुनावों में बहुत कम संख्या में भाग लेती हैं तथा जो भाग लेती हैं वे प्रायः राजनीति की ऊँची कुर्सी तक पहॅुचने अथवा उसे प्राप्त करने में असमर्थ रहती हैं।
Pages : 31-32