ARCHIVES
VOL. 2, ISSUE 5 (2016)
मामानि रइसम गोस्वामी की उपन्यास नीलकंठी ब्रज का विश्लेषणात्मक अध्ययन (असमीया उपन्यास के विशेष सन्दर्भ में)
Authors
जयन्त कुमार बोरो
Abstract
नीलकण्ठी ब्रज उपन्यास में असमीया साहित्य की विशिष्ट लेखिका मामोनि रइसम गोस्वामी जी ने तत्कालीन भारतीय समाज की विडम्बनाओं को जिस तरीके से हमारे समाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है वह अनुठा है। लेखिका ने इस उपन्यास में समाज में विधवा नारी की समस्याओं को करुण से अभिव्यक्त किया है। इस उपन्यास की कथावस्तु ब्रजधाम से गई है। नारी हमारे समाज का सम्मान है लेकिन नारी को जिस रुप में इस उपन्यास में दिखाया गया है वह कहीं न कहीं हमारी समाजिक संगठन की भूल हैं। यह उपन्यास हमारी आस्थाओं पर प्रहार करता है। सौदामिनी, मृणालिनी, शशिप्रभा, तथा अन्य गुमनाम भरी जिन्दगी जी रही विधवा राधेश्यामियों जैसे नारी पात्रों पर आधारित यह उपन्यास हमारे समाज का हस्तामलक जैसा प्रतीत होता हैं। विधवा होना समाज की किसी नारी का दोष नहीं हैं। न ही किसी भी प्रकार से स्त्री पर विधवा बनने का दोष लगाया जाना उचित ही हैं। लेखिका का नारी का करुण पूर्ण चित्रण नारी के अस्तित्व के रक्षा के प्रश्न को उपस्थित करता है।
Download
Pages:60-64
How to cite this article:
जयन्त कुमार बोरो "मामानि रइसम गोस्वामी की उपन्यास नीलकंठी ब्रज का विश्लेषणात्मक अध्ययन (असमीया उपन्यास के विशेष सन्दर्भ में)". International Journal of Hindi Research, Vol 2, Issue 5, 2016, Pages 60-64
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.

