International Journal of Hindi Research

International Journal of Hindi Research

ISSN: 2455-2232

Vol. 2, Issue 5 (2016)

मामानि रइसम गोस्वामी की उपन्यास नीलकंठी ब्रज का विश्लेषणात्मक अध्ययन (असमीया उपन्यास के विशेष सन्दर्भ में)

Author(s): जयन्त कुमार बोरो
Abstract: नीलकण्ठी ब्रज उपन्यास में असमीया साहित्य की विशिष्ट लेखिका मामोनि रइसम गोस्वामी जी ने तत्कालीन भारतीय समाज की विडम्बनाओं को जिस तरीके से हमारे समाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है वह अनुठा है। लेखिका ने इस उपन्यास में समाज में विधवा नारी की समस्याओं को करुण से अभिव्यक्त किया है। इस उपन्यास की कथावस्तु ब्रजधाम से गई है। नारी हमारे समाज का सम्मान है लेकिन नारी को जिस रुप में इस उपन्यास में दिखाया गया है वह कहीं न कहीं हमारी समाजिक संगठन की भूल हैं। यह उपन्यास हमारी आस्थाओं पर प्रहार करता है। सौदामिनी, मृणालिनी, शशिप्रभा, तथा अन्य गुमनाम भरी जिन्दगी जी रही विधवा राधेश्यामियों जैसे नारी पात्रों पर आधारित यह उपन्यास हमारे समाज का हस्तामलक जैसा प्रतीत होता हैं। विधवा होना समाज की किसी नारी का दोष नहीं हैं। न ही किसी भी प्रकार से स्त्री पर विधवा बनने का दोष लगाया जाना उचित ही हैं। लेखिका का नारी का करुण पूर्ण चित्रण नारी के अस्तित्व के रक्षा के प्रश्न को उपस्थित करता है।
Pages: 60-64  |  1282 Views  505 Downloads
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