International Journal of Hindi Research

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Vol. 2, Issue 5 (2016)

जैन रामायणों में वर्णित राम के स्वरूप का तुलनात्मक अध्ययन है


डॉo अनुपमा छाजेड़

भारत के जन-जन के मन में ‘राम’ शब्द इस गहराई से बैठ गया है कि राम नाम के बिना हमें हमारी संस्कृति; धर्म अधूरा-सा प्रतीत होता है । राम अनेक शताब्दियों पूर्व से ही भारत के बहुजन के हृदय के हार, श्रद्धा व भक्ति के केन्द्र रहे है । राम" नाम की सुधा ने ही भारत को अपने पतन काल में भी जीवित बनाये रखा और उसको पुन: उन्नति की और अग्रसर किया। अतः हमें ऐसे 'राम' जो जन-जन के तन मन में समाये हुए हैं, जिनका हमारे धर्म; संस्कृति से इतना गहरा संबंध है उस राम शब्द का तात्पर्य क्या हैं? उनका स्वरूप क्या हैं विभिन्न चिन्तको ज्ञानियों एवं भक्तों के द्वारा राम शब्द के विविध अर्थ प्रस्तुत किए गए हैं राम के मर्यादा पुरुषोंत्त्म रूप को ध्यान में रखकर ही संपूर्ण वर्णन मिलता है।
Pages : 84-87