International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 2, Issue 6 (2016)

जैन दर्शन में ध्यान की विधियाँ

Author(s): धनंजय कुमार जैन, डाॅ0 उपेन्द्र बाबू खत्री, डाॅं0 अखिलेश सिंह, डाॅ0 नवीन दीक्षित
Abstract: जैन दर्शन एक ऐसी यौगिक परंपरा है जो कठोर तपस्या द्वारा अपने ऊपर नियंत्रण करने का प्रयास करता है तथा अपने चित्त को निर्मल करने के लिये अपने कर्मों से निर्मल कर्म करने का प्रयास करता है। अहार विहार में अहिंसा का बहुत सूक्ष्म अध्ययन और प्रयोग करता है। जैन धर्म में ध्यान की विधियाँ कायोत्सर्ग और सामायिक के रूप में सामान्य जन के लिये उपयोग में लायी जाती हैं। मुख्य रूप से ज्ञानार्णव तथा ध्यानस्तव नामक ग्रंथ में अनेक ध्यान विधियों को बताया गया है जिसकी साधना की जाये तो निरंतर ध्यान में रहा जा सकता है। ये ध्यान विधियाँ सामान्य जनों के बीच में प्रचलित नहीं हैं, इस शोधपत्र में यह प्रयास किया है कि जैन दर्शन में वर्णित उन विधियों को प्रस्तुत किया जाये जो सामान्य जन के लिये के उपयोगी हो सकें। सामान्य जन के मानसिक स्वास्थ्य के लिये इन विधियों को उपयोग किया जा सकता है।
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