International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 3, Issue 1 (2017)

लोक - साहित्य की अवधारणा व क्षेत्र

Author(s): डॉ0 उत्तम पटेल
Abstract: लोक-साहित्य लोक-संस्कृति अथवा लोक-वार्ता का एक महत्वपूर्ण अंग है। यदि लोक-संस्कृति एक विशाल वट-वृक्ष है तो लोक-साहित्य उसकी एक शाखा है। यदि लोक-संस्कृति शरीर है तो लोक-साहित्य उसका एक अवयव है। लोक-संस्कृति का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है तो लोक-साहित्य का विस्तार संकुचित है। लोक-संस्कृति की व्यापकता जन-जीवन के समस्त व्यापारों में उपलब्ध होती है तो लोक-साहित्य जनता के गीतों, कथाओं, गाथाओं, मुहावरों तक ही सीमित है। लोक-साहित्य अंग है तो लोक-संस्कृति अंगी है। लोक-साहित्य लोक-संस्कृति का एक भाग मात्र है। लोक-गीत, लोक-कथाएँ, लोक-गाथाएँ, कथा-गीत, धर्म-गाथाएँ, लोक-नाट्य, नौटंगी, रास-लीला आदि लोक-साहित्य से संबद्ध विषय हैं।
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