International Journal of Hindi Research

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Vol. 3, Issue 1 (2017)

ओमप्रकाश वाल्मिकी के साहित्य में सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक चित्रण


माया माहेश्वरी, निर्मला राव

"साहित्य समाज का दर्पण है"। साहित्य भाव व विचार की अभिव्यक्ति का साधन मात्र ही नहीं है बल्कि वह रचयिता की समग्र जीवन दृष्टि का प्रतिफलन है। दलित साहित्य में दलितों के बारे में काफी कुछ लिखा गया है, परन्तु ओमप्रकाश वाल्मिकी की आत्मकथा जूठन में दलित जीवन की पीड़ा, तिरस्कार, शोषण इत्यादि का वास्तविक रुप से वर्णन किया गया है। ओमप्रकाश वाल्मिकी ने जूठन के द्वारा दलितों के सामाजिक, आर्थिक धार्मिक और सांस्कृतिक रुप का जो चित्रण किया है, वो किसी और दलित साहित्य में नही मिलता। ओमप्रकाश वाल्मिकी को दलित जीवन जीने का अनुभव होने के कारण ‘जूठन‘ के माध्यम से इन्होंने दलितों के यर्थाथ अनुभवों की पीड़ा को व्यक्त किया है।
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