International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 3, Issue 1 (2017)

मधु काँकरिया के उपन्यासों में नारी का वैयक्तिक जीवन

Author(s): नीता कुमारी, आशुतोष कुमार द्विवेदी
Abstract: नारी के विभिन्न व्यक्तित्व को देखना और आधुनिक युग में स्त्री के चरित्र को लेकर लिखना।
हिन्दी साहित्य में स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, आदिवासी विमर्श आदि का प्रचलन तेजी से दिखाई देता है। इसके कई कारण है। इनमें भी स्त्री विमर्श को लेकर लिखने वाले रचनाकार महत्वपूर्ण दिखाई देता है, उसका कारण यह रहा है कि स्त्री समाज की आधी शक्ति होकर भी त्याग एवं समर्पण की प्रतिमूर्ति होकर भी पुरुष के लिए सदैव प्रेरक शक्ति के रूप में कार्य करने के बावजूद उसे एक मर्यादा के बंधन में चार दीवारों के अंदर जीवन जीना पड़ रहा है।
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