International Journal of Hindi Research

International Journal of Hindi Research

ISSN: 2455-2232

Vol. 3, Issue 1 (2017)

तुलसी साहित्य व राजनीतिक चिंतन

Author(s): पिंकी शर्मा
Abstract: राजतंत्र के मध्य तुलसी ने रामराज्य नामक जिस राजनीतिक एवं सामाजिक वैचारिक का सूत्रपात किया उसकी प्राप्ति आज भी विश्व के सभी लोकतंत्रों का अंतिम लक्ष्य है। रामराज्य सुशासन, सुव्यवस्था, समाज एंव राष्ट्र के सर्वांगीण विकास, स्वतंत्रता, समानता, सामाजिक न्याय, बंधुत्व और प्रजाहित में सतत संलग्न रहने का नाम है। इस व्यवस्था में सभी अपने को स्वस्थ, सुखी, प्रसन्न, विकासशील, समृद्ध और सवतंत्र अनुभूत करते हुए स्वकत्र्तव्यपालन में निमग्न रहते हैं। कोई किसी की उन्नति और प्रसन्नता में बाधक नहीं बनता है। तुलसी का रामराज्य कहने भर को राजतंत्र था। वह अन्य राजतंत्रों के सदृश निरंकुश, स्वेच्छाधारी एंव अमर्यादित न होकर लोकोन्मुख, लोकशील एंव जनवादी था। इस तंत्र में राजा का मनोनयन तक न केवल जन भावनाओं के अनुरूप था, अपितु लोक द्वारा समर्थित भी था। श्रीराम को युवराज बनाने का विचार दशरथ से भी पहले जन सामान्य के मन में स्फुरित होता है,
Pages: 74-77  |  1104 Views  452 Downloads
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