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VOL. 3, ISSUE 2 (2017)
धरती का कवि त्रिलोचन
Authors
मंजू देवी
Abstract
प्रगतिवादी कवि त्रिलोचन ने काव्य को जीवन की वास्तविकता से जोड़कर कविता को सर्वग्राह्य एवं व्यापक बनाने में अतुलनीय योग दिया है। उनका काव्य सैद्धांतिकता से दूर मानवीय जीवन की वास्तविक अनुभूतियों का चित्राण करता है। ये अनुभव कवि ने यथार्थ के ताप से तपकर निर्मित किये हैं। उनकी कविताओं में सामाजिक यथार्थ, युगानुभूति, मानवीय संवेदना, वर्ग चेतना तथा वर्ग क्रांति के स्वर आदि प्रगतिशील तत्वों के रूप में प्रतिष्ठित हुए हैं। उनके यहाँ प्रेम की भावना से लेकर प्रकृति सौन्दर्य तक सभी श्रम का पर्याय बन कर उपस्थित हुए हैं। उनकी कविता सर्वहारा वर्ग की आशाओं आकांक्षाओं को चित्रित कर उन्हें नई दिशा प्रदान करती है। उनकी कविताएँ जन सामान्य में ऊर्जा का विस्तार कर नव्य समाज एवं संस्कृति निर्माण के लिए प्रोत्साहित करती है। त्रिलोचन की सृजनात्मक दृष्टि में ध्रती अपने अनेक रूप रंगों के साथ सदैव उपस्थित रही है। ध्रती और श्रमजीवियों से वास्तविक प्रेम करने वाले त्रिलोचन को ‘ध्रती का कवि’ कहा गया है।
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Pages:01-05
How to cite this article:
मंजू देवी "धरती का कवि त्रिलोचन". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 2, 2017, Pages 01-05
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