International Journal of Hindi Research

International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 3, Issue 3 (2017)

पारिवारिक विघटन के बीच जूझती नारी अस्मिता

Author(s): कीर्ति भारद्वाज
Abstract: सभ्यता के विस्तार तथा सामाजिक संरचना के अधिकाधिक जटिल हो जाने के कारण भारतीय नारियों की आकांक्षा में भी परिवर्तन आया है तथा सभ्यता के विस्तार तथा सामाजिक संरचना के अधिकाधिक जटिल हो जाने के कारण भारतीय नारियों की आकांक्षा भी अब जटिल एवं उलझी हुई हो गई हैं। दाम्पत्य जीवन में नारी कुछ भी करने को तैयार हो जाती है क्योंकि वह नहीं चाहती कि उसके पति के साथ संबंध टूट जाए। इसलिए वह अपने पति द्वारा दिए गए अपमान को भी चुपचाप सहन कर लेती है क्योंकि वह अपने दाम्पत्य जीवन में तालमेल बैठाना चाहती है।
Pages: 33-35  |  1741 Views  762 Downloads
publish book online
library subscription
Journals List Click Here Research Journals Research Journals
Please use another browser.