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VOL. 3, ISSUE 5 (2017)
‘निराला’ की कालजयी रचना ‘राम की शक्तिपूजा’
Authors
डाँ0 दिलीप कुमार झा
Abstract
‘‘सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ आधुनिक युग के सर्वाधिक मौलिक क्षमता से संपन्न कवि है। भाषा और संवेदना के जितने रंग और स्तर निराला मे है, उतने किसी अन्य कवि मे नही। ‘जुही की कली’ (1916) से लेकर मृत्यु विषयक उनकी अंतिम कविताओं (1961) तक निराला का कवि बराबर गतिशील और सर्जनशील रहा है। जयशंकर प्रसाद की तरह निराला ने भी पिभिन्न काव्य - रूपों का प्रयोग किया, परंतु जहाँ प्रसाद कविता के साथ नाटक, उपन्यास, कहानी तथा आलोचन में भी अपने को कुशलतापूर्वक व्यक्त कर सके है, वहाँ निराला का सफल माध्यम कविता ही है। ‘‘प्रस्तुत शोध पत्र में कालजयी कविता के रूप में ‘राम की शक्तिपुजा’ पर विचार किया गया है।
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Pages:85-88
How to cite this article:
डाँ0 दिलीप कुमार झा "‘निराला’ की कालजयी रचना ‘राम की शक्तिपूजा’". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 5, 2017, Pages 85-88
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