International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 3, Issue 6 (2017)

मालती जोशी की कहानी में स्त्री अस्मिता (सन्दर्भ : पिया पीर न जानी)

Author(s): अशोक कुमार सखवार
Abstract: हिंदी में स्त्री अस्मिता, स्वानुभूतियों, स्त्री मन के सूक्ष्म स्पंदनों को अपने लेखन में मजबूती से रखने वाली लेखिकाओं में मालती जोशी, कृष्णा सोबती, मृणाल पाण्डे, उषा प्रियंवदा, ममता कालिया, मृदुला गर्ग, राजी सेठ, मैत्रेयी पुष्पा, नासिरा शर्मा, रमणिका गुप्ता, प्रभा खेतान आदि ने नारी चेतना को जाग्रत करने का कार्य किया है। ‘पिया पीर न जानी’ कहानी की लेखिका मालती जोशी हिंदी की प्रतिष्ठित महिला कहानीकार हैं। उन्होंने कहानी के माध्यम से पितृसत्तात्मक समाज में स्त्रियों की पारिवारिक स्थिति के कारण उत्पन्न मानसिक संवेदना और स्त्री के प्रतिरोधी स्वर को व्यक्त किया है। पुरषसत्तात्मक समाज में बचपन से ही लड़का-लड़की होने पर परिवार के द्वारा उनके साथ अलग-अलग व्यवहार किया जाने के कारण लड़की के अंतर्मन पर प्रभाव पड़ना शरू हो जाता है। परिवार में दोयम व्यवहार के कारण उसके आचार-विचार परिवर्तित होते चले जाते हैं। उसके अपने निजी निर्णय भी परिवार के द्वारा निर्धारित होते है। परिवार में बच्चे सामाजिक नियम के विरुद्ध कुछ कार्य करते हैं उसका दोष भी उसकी माँ को ही दिया जाता है। लड़की के जन्म लेने और पति के निठल्लेपन का भी जिम्मेदार पत्नी को ही ठेराया जाता है।आधुनिक शिक्षित महिलाए पुरुषसत्तात्मक समाज में कैसे अस्मिता की तलाश में प्रतिरोध कराती हैं।
Pages: 19-21  |  783 Views  292 Downloads
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