International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 3, Issue 6 (2017)

श्री राम के पथ प्रदर्शक महर्षि अगस्त

Author(s): वरूण मिश्र
Abstract: ’’रामायण’’ का शब्दार्थ है ’’राम का आयण’’ अर्थात श्री राम का भ्रमण, श्री राम भ्रमण अर्थात बनवास सउद्देश्य था। श्रीराम का बन गमन जन मंगल हेतु तथा भारत को रक्ष संसकृति से मुक्त करना था।
श्री राम से पहले महर्षि, मुनि, ऋषि आदि भी इस कार्य में लगे थे। इन ऋषियों ने दण्डकारण्य में जगह-जगह आश्रम स्थापित कर रक्खे थे जो ऊर्जा के केन्द्र तथा साधारण जन को प्रेम रज्जू में बांध पठन पाठन तथा शस्त्र विद्या की दीक्षा देते थे। इसीलिये रावण ऋषि मुनियों के आश्रमों से कुपित था, तथा अपने सैनिकों को आज्ञा दे रक्खी थी कि आश्रमों को उजाड़ो एवं उन्हें तंग करो।
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