International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 4, Issue 1 (2018)

संस्कृति की धरोहर के रूप में संगीत के विविध रूप

Author(s): ममता
Abstract: संगीत का संबंध हमारे अतीत काल से चला आ रहा है प्रारम्भ में ईश्वर की स्तुति करने के लिए गायन किया जाता था। आज इस ने जगत में विशेष महत्व बना लिया, संगीत का इतिहास बहुत ही प्राचीन है रामायण, महाभारत इत्यादि से ही अपना महत्व रखता आया है कृष्ण और गोपिकाओं की रास लीलाओं का बड़ा मनोरंजक दृश्य है, संगीत का गायन किसी ना किसी उद्देश्य को केन्द्र में रखकर ही गाया जाता था। अजंता, एलोरा की गुफाओं में आज भी इस की प्रांसगिकता दिखाई देती है। अमीर खुसरो भक्ति काल के समृद्ध व्याख्याता थे। श्लोकों का गायन भी आज समृद्ध है भारतीय साहित्य अपनी लोक संस्कृति व परम्पराओं के लिए ख्याति प्राप्त है। साहित्य में आदिकाल, भक्तिकाल, आधुनिक काल में भी संगीत ने अपने समाज को प्रभावित किया है। भारत में जाति-भेद से ऊपर उठकर संगीत को महत्व दिया गया है साहित्य इस से समद्ध है यहाँ होली, ईद सभी पर संगीत को महत्व दिया गया है। आज भी संगीत के माध्यम से बहुत से मनोरोगांे को दूर करने का काम किया जाता है, जिससे मनुष्य ही नहीं पशु भी प्रभावित होता है। मीराबाई, सूरदास, कबीर, तुलसीदास इत्यादि ने साहित्य को समृद्ध किया। जिन ग्रंथों ने पूरे जन-मानस को प्रभावित किया उन की भविष्य में भी प्रंासगिकता बनी हुई है जिससे जन-मानस गतिशील है।
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