International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 4, Issue 1 (2018)

जयप्रकाश कर्दम के उपन्यास ‘छप्पर’ की प्रासंगिकता आज-कल

Author(s): Aswathi M Nair, Dr. B Anirudhan
Abstract: जयप्रकाश कर्दम का ‘छप्पर’ उपन्यास पहला दलित उपन्यास है| जिसमें दलितों के जिंदगी के बारे में बताते है | लेकिन आज भी दलितों की स्थिति उतनी बुरी है, नहीं| तो छप्पर उपन्यास प्रासंगिक है या नहीं, छप्पर प्रासंगिक है दलितों के लिए भी और गैर दलितों के लिए भी | भारत में अभावग्रस्थ जीवन जीने वाले सभी लोग दलित नहीं है | छप्पर एक उम्मीद का किरण है, वह सबको आगे बढने की शक्ति देता है| छप्पर में लोगों को आपस में मिलके रहने की सुविचार लेखक सबको देते हैं |
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