International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 4, Issue 1 (2018)

“धार” उपन्यास में आदिवासी जीवन का यथार्थ

Author(s): Dr. P Ganesan, Anjana AS
Abstract: हिंदी कथाकार संजीव का “धार” (१९९०) एक ऐसा ही उपन्यास है, जो बिहार पहले, अब झारखंड राज्य के एक आदिवासी जीवन और समाज (संथाल परगना) की वास्तविकता को पूरी सिद्दत से उभारता है I आदिवासियों के शोषण, संघर्ष और उनके जीवन की चुनौतियों के साथ उनके जेहन में पल रहे सपनों को भी स्वर देता है I संजीव का यह उपन्यास (धार) तमाम नामचीन लोगों के साथ संथाल परगना के वासियों को समर्पित है, जो उनके कथाकार की आदिवासी जीवन-समाज में होने वाली गहरी सम्पृक्ति को बताता है I
Pages: 34-36  |  1775 Views  1299 Downloads
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