International Journal of Hindi Research

International Journal of Hindi Research

ISSN: 2455-2232

Vol. 4, Issue 4 (2018)

मलयालम कवि कुमारनाशान के काव्य में युग बोध

Author(s): डाँ0 जार्ज जोसफ
Abstract: कुमारनाशान मलयालम काव्य साहित्य के वरिष्ठ एवं लोकप्रिय कवि रहे । इनकी सर्वतोन्मुखी प्रतिभा ने उनको आधुनिक भारतीय साहित्य में एक उत्कृष्ठ स्थान प्रदान किया है । भावपक्ष एवं कलापक्ष की दृष्टि से इनकी रचनाएँ अत्यंत श्रेष्ठ एवं उच्च कोटि की हैं । वे भारतीय संस्कृति के अमर व्याख्याता थे । इनके काव्य की आधार शिला भारतीय संस्कृति ही हैं । भारतीय सांस्कृतिक दीप्ति, आत्मसम्मान, क्रांतिकारी चेतना, गंभीरता एवं आत्मविश्वास की भावना भी इनमें पर्याप्त मात्रा में दर्शनीय हैं । कुमारनाशान ने मलयालम कविता को जाति, वर्ण, देश और काल की सीमाओं से मुक्त कर विश्वप्रेम के असीम आदर्शों की ओर उन्मुख किया । कुमारनाशान को मलयालम भाषा के ‘कालिदास’ माने जाते थे । भावपक्ष एवं कलापक्ष की दृष्टि से इनकी रचनाएँ अत्यंत श्रेष्ठ एवं उच्च कोटि की है । उनके काव्य में युग बोध की प्रवृत्तियाँ भरपूर दिखाई पडती है, जैसे मानवतावादी चेतना, विद्रोही स्वर, राष्ट्रीय चेतना, दार्शनिकता, प्रेम की अभिव्यक्ति, आत्माभिव्यक्ति इत्यादि । इसके आधार पर कवि के व्यक्तित्व में युगबोध विस्तार से प्रतिफलित होता है ।
Pages: 56-58  |  359 Views  145 Downloads
International Journal of Hindi Research
Journals List Click Here Research Journals Research Journals