International Journal of Hindi Research

International Journal of Hindi Research

ISSN: 2455-2232

Vol. 4, Issue 5 (2018)

मालती जोशी के साहित्य पर मध्यम वर्गीय चेतना का विकास

Author(s): डाॅ0 सुरेश प्रसाद चैधरी
Abstract:
मालती जोशी के साहित्य पर आधुनिक काल के साहित्य को देखने का प्रयास करते हैं तो कथा साहित्य में नारी चित्रण विशेषताएँ देखने को मिलती हैं। मालती जोशी के जीवन में मध्यमवर्गीय चेनता का विकास कैसे होता हैं। यह मानव जीवन की अनेक विसमताओं का परिणाम हैं। जहाँ मानव-मानव के भेदात्मक सीढ़ी से भरा पड़ा हो। वहाँ समय और समाज की विसमषताओं का परिणाम ही दिखाई देता है।
मालती जोशी ने उपन्यास साहित्य में मध्यमवर्गीय परिवार को केन्द्र बिन्दु बनाकर इन्होंने समाज के सामने एक आईना प्रस्तुत किया है। जिसके सम्बन्ध में कहती है। किसी भी स्त्रिी में विवाह के बाद विभिन्न समस्याऐं उत्पन्न होती है। यहाँ तक दोनों के विचारों का न मिलना भी है। जहाँ व्यक्ति की विचारधारा का परिणाम ही मानव की अवहेलना का कारण बन जाता है। पारिवारिक द्वेषु और उलझनों से भरा समाज का यह परिदृश्य सामाने आता है। जहाँ मानव समाज के विचारों का आधार ही मानवीय विचारधारा का परिणाम होता जा रहा है। इस प्रकार से इन मध्यमवर्गीय परिवार में उत्पन्न होने वाली कठिनाईयों का परिणाम ही है।
मालती जोशी के विश्वगाथा के केन्द्र बिन्दुओं के परिणाम स्वरूप सशक्त नारी चरित्र की ओर ध्यान आकृष्ट कराती है। जहाँ ऐसे मध्यमवर्गीय परिवार में नारी के चरित्र को प्रस्तुत करती है। उसके विपरीत एक ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है। जहाँ वह नारी किसी दूसरे के शोषण का शिकार होती है। इस प्रकार से घर और ससुराल के साथ में पति की अनेक उपेक्षाओं को झेलना उसे अत्याचार को सहने वाली अनेकों महिलाओं का प्रतिनिधित्व मालती जोशी के उपन्यास शोभायात्रा में इन कठिनाईयों का वर्णन करती है। जहाँ समय और समाज की अनेक कठिनाईयों का परिणाम स्त्री और पुरूष की समस्या भरा जीवन है। जहाँ नारी का जीवन अकुलाहट भरा है। ऐसी अनेक स्थितियों में जीवन और जगत् की कठिनाईयों को देखने से पता चलता है।
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