International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 4, Issue 5 (2018)

कालजयी रचनाकार गजानन माधव मुक्तिबोध की कालजयी कविता 'अंधेरें में' की विशिष्टता

Author(s): डाॅ0 दिलीप कुमार झा
Abstract: गजानन माधव 'मुक्तिबोध' हिन्दी के कालजयी रचनाकार है। उनकी कविता 'अंधेरे में' में एक अमर कविता है। मुक्तिबोध की प्रसिध्द लंबी कविता 'अंधेरे में' से गुजरना एक काव्ययात्रा है। तरह - तरह के अनुभवों के बीच वह कवि की न खत्म होने वाली रचनात्मकता की तलाश है जिसे उसने 'परम अभिव्यक्ति' नाम दिया है। यह रचनात्मकता बहुमुखी संघर्षो में बनती है और एक बेहतर सामाजिक जीवनक्रम की आकांक्षा से अभिप्रेरित है। 'अंधेरे में' का ध्वंस एलियट के ’बैस्ट लैण्ड’ के माहौल की कभी-कभी याद दिलाता है। मुक्तिबोध सस्ते समन्वय या कि औपचारिक आशावाद से ठगे जाने वाले नही, इसलिए कविता में तलाश अंत तक जारी है। शांति पाठ से उन्हें शांति न मिलती, शायद वही शांत वे चाहते नही। समस्या पश्चिम की अलग है हमारी अलग। ध्वंस वहाँ युध्द का था, यहाँ देशी-विदेशी शोषण का। 'अंधेरे में' का पहला प्रकाशन 'कल्पना' पत्रिका में 1964 में हुआ 'आशंका के द्वीप अंधेरे में' नाम से।
Pages: 16-19  |  8327 Views  7744 Downloads
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