International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 4, Issue 5 (2018)

मृदुला गर्ग : उपन्यासों की दुनिया व स्त्री अस्मिता का सच

Author(s): मीनू साकेत
Abstract: बीसवीं सदी में उपन्यास का पारम्परिक स्वरूप परिवर्तित हुआ है। आज शिल्प को कभी कथ्य के समान ही महत्व दिया जाने लगा है और शिल्प की चर्चा के बिना उपन्यास की समीक्षा अधूरी मानी जाने लगी है। आधुनिक उपन्यासकारों के लिए उपन्यास केवल मानव-जीवन का चित्र ही नहीं बल्कि एक कला-रूप भी है। उनके लिए ‘क्या कहना है’ यही नहीं बल्कि ‘कैसे कहना है’ यह भी उतना ही महत्वपूर्ण प्रश्न है और इसीलिए आज का आलोचक भी उपन्यास को एक कलाकृति के रूप में परखना चाहता है, उसकी विविध रचना-शैलियों, भाषिक उपकरणों-बिम्ब, प्रतीक, संकेत आदि को सामने रखते हुए वह उपन्यास की शिल्पगत समीक्षा करता है।
Pages: 44-47  |  832 Views  496 Downloads
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