International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 4, Issue 6 (2018)

समकालीन कविता में मार्क्सवादी चिंतन

Author(s): पी. ए. देवस्या
Abstract: साठोत्तरी हिन्दी कविता या समकालीन हिन्दी कविता नई कविता के विविध संघर्षों में एक महत्वपूर्ण घटना है। मानव मन की जीवनानुभूतियों और उनके मन के सपने और स्मृतियों की शाब्दिक अभिव्यक्ति कविता में झलक पडती हैं। कुछ विद्वानों के मतानुसार नई कविता का अन्य कुछ नाम भी हैं- तत्कालीन कविता या समसामयिक कविता। समकालीन कवि को सदा भविष्य के संबंध में मंगलमयी प्रतीक्षा है। भविष्य की संभावनाओं की ओर देखना, पहचानना और समझना इस कविता की सब से बडी विशेषता है। यह कविता पढकर वर्तमानकाल का बोध हो सकता है क्योंकि उसमें जीते, संघर्ष करते, लडते, तडपते, गजरते मानव का यथार्थ चित्र मिलता है।
Pages: 24-26  |  344 Views  106 Downloads
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