International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 5, Issue 2 (2019)

लम्बी कहानी तीसरी कसम में प्रयुक्त शिल्प विधान

Author(s): दिगंत बोरा
Abstract: शिल्प अंग्रेजी के ‘technique’ का हिंदी रूपांतर है । ‘Craft’, ‘structure’ और ‘form’ यें तीनों अंग्रेजी में ‘technique’ का ही पर्याय है । फॉर्म का शाब्दिक अर्थ है को अभिव्यक्त करते है । जिसके द्वारा कथाकार अपनी कथा रूप । शिल्प का संबंध का रचना पद्धति से है । लेखक अपने कथा को अभिव्यक्त करने के लिए जिस पद्धतियों का प्रयोग करते है उसे ही शिल्प कहा जाता है । फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ ने अपनी कहानी ‘तीसरी कसम’ कथा की अभिव्यक्ति के लिए विविध उपायों को प्रयोग किया है जैसे- सांकेतिकता, प्रतीकात्मकता, बिम्ब विधान, काव्यात्मक भाषा, चित्रात्मक भाषा, बोलचाल की भाषा, लोकोक्ति, लोकगीतों, लोकगाथाओं, मिथकों, मुहावरा आदि । कथा कहने की विविध शैलियों में वर्णनात्मक शैली, पूर्वदिप्ती शैली, संवदात्मक शैली आदि का प्रयोग की हैं । पात्रों की रूप रचना के प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों शैली का सुंदर प्रयोग किया है । विविध भाषाओं के शब्द प्रयोग से रेणु ने अपनी कहानी को एक नूतन रूप प्रदान की है । रेणु जी ने भाव, विचार तथा चरित्र के अनुकूल भाषा का नूतन प्रयोग किया है । उन्होंने तत्सम, तद्भव, देशज, आगत आदि शब्दों का सार्थक प्रयोग किया है। इस तरह रेणु ने अपनी कहानी ‘तीसरी कसम’ में शिल्प के विविध रूपों का सुंदर प्रयोग किया हैं ।
Pages: 01-05  |  892 Views  370 Downloads
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