International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 5, Issue 2 (2019)

नयी कविता और अभिनव नाट्य प्रयोग

Author(s): सीमा मिश्रा
Abstract: हिन्दी नाटकों के विकास का जिस संदर्भ में इस शोध पत्र में विवेचन किया जा रहा है, वह आधुनिक काल की देन है | यघपि संस्कृत और अपभ्रंश में नाटकों की रचना हुई है और संस्कृत नाटक तथा नाट्य शास्त्र विश्व साहित्य में चर्चा का विषय रहा है | यहाँ कवि कालिदास की प्रसिद्ध कृति अभिज्ञान शाकुन्तलम तथा भास की प्रतिमा नाटकम, स्वप्न वासवदन्तम, विशाखादत्त्त का नाटक मुद्राराक्षस शूद्रक का मृच्छकटिकम, तथा भवभूति का उत्त्तर राम चरितम की चर्चा भी की गई है | इसी के साथ समसामयिक घटनाओ के प्रभाव में सृजित नयी कविता काव्य धारा का नाट्य विधा के विकास पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण किया गया है |
Pages: 33-35  |  367 Views  138 Downloads
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