International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 5, Issue 2 (2019)

असमिया भाषा पर मुक्त अर्थनीति का प्रभाव

Author(s): दिगंत बोरा
Abstract: भाषा परिवर्तनशील है । भाषा समय के साथ परिवर्तन होती रहती है । आधुनिकीकरण, मुक्त अर्थनीति, विश्वायन और व्यापार-वाणिज्य के प्रभाव से असमिया भाषा में व्यापक परिवर्तन हुआ है । विज्ञान की उन्नति और व्यापार-वाणिज्य में नये-नये सामग्री आने के साथ-साथ भाषा में भी नये-नये शब्दों ने अपना स्थान बना लिया है । अंग्रेजी या दूसरे भाषा से आये हुए शब्दों के लिए असमिया भाषा में कोई प्रतिशब्द नहीं है । यदि कोई प्रतिशब्द है भी, तो वे भी प्रचलन में नहीं है । इसलिए दूसरे भाषा के शब्दों ने असमिया भाषा में अपनी जगह बना ली है । कम्पूटर के लिए असमिया का प्रतिशब्द है ‘परिकलन यंत्र’ । आज शायद ही कोई व्यक्ति है जो परिकलन यंत्र ही कम्पूटर है, यह जानता हो । परंतु कम्पूटर को हर कोई जानता है । आज असमिया भाषा में असमिया प्रतिशब्दों के अभाव में कम्पूटर, मोबाइल, बेंक आदि से संबंधित अनेक शब्दों ने अपना स्थान बना लिया है । आज आधुनिकीकरण के प्रभाव से लोगों में वाक्यों के अधुरे प्रयोग की फैशन चल पड़ा है । जैसे – प्रश्न – ‘कत जोवा ?’ उत्तर – ‘गुवाहटी’, परंतु ये वाक्य होना चाहिए था – ‘गुवाहाटीलै जाउ’ । आज वाक्य में असमिया शब्दों की जगह अनेक विदेशी शब्दों ने ले लिया है । उदाहरण – ‘मई मारकेट जाउ’, ‘मई स्कूल जाउ’, ‘मई रेंतत थाको’ आदि । आज विश्वायन के प्रभाव से समाज में स्त्री-पुरूष में भेद समाप्त होने के साथ-साथ भाषा में भी लिंग भेद समाप्त हो गई है । उदाहरण – आज लेखक, सभापति, सम्पादक, वकील, प्रवक्ता आदि शब्दों का प्रयोग दोंनों लिंगों के लिए समान रूप में किया जाता है । इसी तरह विश्वायन के प्रभाव से असमिया भाषा में अनेक परिवर्तन हुआ है ।
Pages: 28-29  |  419 Views  94 Downloads
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