International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 5, Issue 3 (2019)

नवगीत की वैचारिकता और उपलब्धि

Author(s): मनीष कुमार तिवारी, डाॅ. उर्मिला वर्मा
Abstract: वैचारिकता की दृष्टि से यदि हम विचार करें तो यह कथ्य स्पष्ट होता है कि कवि की जागरूकता ही, नवगीत की वैचारिकता है। जागरूकता वैचारिकता का प्रथम सोपान है। इस सीढ़ी तक पहुँचकर कवि सधे हुए चैकन्नेपन के साथ अपने जीवन के चारो ओर घटित होने वाले घटनाचक्र की खबर रखते हैं। नवगीतकार ज्ञान को व्यवहार की अग्नि में तपा लेने वाले रचनाकार हैं। गाँधीवाद और माक्र्सवाद की सामाजिक चेतना नवगीतकारों के अन्तव्र्यक्तित्व एवं उसमें विद्यमान कवि व्यक्तित्व की संरचना में सुचिंत रूप से सहायक रहे हैं। इन रचनाकारों ने विभिन्न दृष्टियों से आलोक ग्रहण कर अपनी स्वयं की साहित्यिक जीवन दृष्टि विकसित की है। विश्लेषण की दृष्टि से यदि यह कहा जाय कि नवगीतकार सहज जीवन रस को सर्वोपरि मूल्य के रूप में स्थापित करते हैं, तो यथेष्ठ लगता हैं।
Pages: 20-22  |  156 Views  61 Downloads
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