International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 5, Issue 4 (2019)

फीजी की हिंदी कविता में प्रवासी संवेदना

Author(s): Subashni Shareen Lata
Abstract: फीजी द्वीप में प्रवासी भारतीयों का इतिहास लगभग 140 वर्ष पुराना है। सन् 1879 से सन् 1916 तक कुल 87 यात्राओं में 60,965 मजदूर फीजी ले जाए गए थे। गिरमिट प्रथा की समाप्ति पश्चात अधिकतर गिरमिटियाँ वहीं फीजी में ही बस गए। उन्नीसवीं शताब्दी में भारत से बिछड़े इन गिरमिटिया मजदूरों ने अपना देश तो त्यागा परन्तु अपनी भाषिक परंपरा और सांस्कृतिक संपत्ति को कठिन काल में भी कायम रखा। इन प्रवासी कवियों ने अपनी रचनाधर्मिता से हिंदी साहित्य को सघन बनाने के साथ-साथ पाठक वर्ग को प्रवास की संस्कृति, संस्कार एवं उस भूभाग से जुड़े लोगों की स्थिति और संवेदनाओं से अवगत कराने का कार्य किया है। भारतवंशियों की मर्मस्पर्शी अनुभवों से गठित होने वाली अनुभूतियों से संवलित उनकी कविताओं में विस्थापन की पीड़ा, स्वदेश प्रेम, अपनों से बिछड़ने का दर्द, अस्तित्व द्वंद्व, जीवन संघर्ष, जीवन परिवर्तन, आदि संवेदनाएं चित्रित हैं।
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