International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 5, Issue 4 (2019)

अनूप अशेष के नवगीतों में समृद्यता

Author(s): डाॅ0 बीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी
Abstract: अनूप अशेष के नवगीतों का अध्ययन एवं रसास्वादन करने से एक ऐसी अद्भुत अनुभूति होती है जो गीतों को नवीन कला एवं दिशा से अभिभूत रहती है -पाॅंचवे छठवें दशक के संधिकाल में जब हिन्दी कविता अनेक धाराओं ओैर वर्गो में विभाजित हो चुकी थी, तथा अनेक नामों से अभिहीत होने के कारण किसिम किसिम की हिन्दी कविता के रूप में पहचानी जाने लगी थी, ऐसे समय में अनूप अशेष ने नवगीत को सही दिशा दी इनका जन्म 07 अप्रैल सन् 1945 ई. को ग्राम सोनौरा, जिला सतना, मध्यप्रदेष मे हुआ था । इन्होनें हिन्दी से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की । ‘लौट आयेगें सगुन पंछी’ ‘वह मेरे गाॅव की हॅंसी थी’ नामक नवगीत संकलन (1980) में प्रकाषित हुआ ।
Pages: 48-50  |  37 Views  17 Downloads
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