International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 5, Issue 4 (2019)

यौनकर्मी जीवन की समस्याएँ: माँ

Author(s): राज बहादुर पुष्कर, डॉ. जय कौशल
Abstract: प्रस्तुत आलेख पं. विशम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ कृत ‘माँ’ उपन्यास के कथानक और उसके पात्रों के बहाने सदियों से चली आ रही स्त्री-समस्याओं को सामने लाने का प्रयास करता है। किसी भी परिवार, समाज, राष्ट्र के निर्माण स्त्रियों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। परंतु वह राष्ट्र, समाज अथवा परिवार अपने निर्मात्री स्त्रियों को बदले में क्या दे पाता है, उपन्यास के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया गया है। साहित्य निश्चित ही समाज की विसंगतियों, विद्रूपताओं को हमारे सम्मुख लाता है, ऐसे में साहित्य प्रतिनिधि के रूप में इस उपन्यास की क्या महत्ता है, यह भी समझने का प्रयास किया गया है।
Pages: 75-77  |  206 Views  63 Downloads
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