International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 5, Issue 5 (2019)

हिंदी व्याकरण जाँचक विकास में ‘संज्ञा+संज्ञा’ पदबंध समस्या

Author(s): Dhanji Prasad
Abstract: किसी पाठ के वाक्यों में होने वाली व्याकरणिक त्रुटियों को चिह्नित करने और उपयुक्त सुझाव प्रस्तुत करने वाले सॉफ्टवेयर को व्याकरण जाँचक कहते हैं। इसका निर्माण किसी भी भाषा की प्रकृति और संरचनात्मक नियमों के अनुसार किया जाता है। ‘हिंदी’ के लिए नियम-आधारित व्याकरण जाँचक का विकास करते हुए ‘पदबंध’ और ‘वाक्य’ दोनों स्तरों पर नियमों की आवश्यकता होती है। एक नियम-आधारित व्याकरण जाँचक को प्राकृतिक भाषा संसाधन (NLP) के सभी चरणों से गुजरना पड़ता है, जिनमें ‘टैगिंग’ (Tagging) और ‘पदबंध चिह्नन’ (Phrase Marking) मुख्य हैं। एक वाक्य में आए शब्दों को टैग करने के बाद उसके पदबंधों को चिह्नित करने के बाद ही उस पर व्याकरणिक परीक्षण संबंधी नियमों का प्रयोग होता है। पदबंध चिह्नन में पदबंध सीमाओं का निर्धारण आरंभिक कार्य होता है। हिंदी में संज्ञा पदबंध सीमाओं के निर्धारण हेतु ‘परसर्ग’ (ने, को, से, पर आदि) तथा ‘वाला’ आदि शब्दों का चिह्नक के रूप में प्रयोग किया जाता है। किंतु बहुत सी वाक्य-रचनाओं में ‘कर्ता’ और ‘कर्म’ के बाद परसर्ग या ऐसे किसी भी शब्द का प्रयोग नहीं होता, जिससे एक पदबंध सीमा वहीं पर मान ली जाए। ऐसी स्थिति में शीर्ष संज्ञा पदों को ही पदबंध की सीमा के रूप में मान लिया जाता है, किंतु हिंदी में कुछ ऐसे ‘संज्ञा+संज्ञा’ पद-समूह पाए जाते हैं, जो स्वतंत्र रूप से संज्ञा पदबंध होने ही क्षमता रखते हुए भी एक ही संज्ञा पदबंध का अंग होते हैं। प्रस्तुत शोधपत्र में व्याकरण जाँचक के परिप्रेक्ष्य में ऐसे ही पद-समूहों पर विचार किया गया है। प्रस्तुत शोधपत्र में सर्वप्रथम हिंदी व्याकरण के स्वरूप की संक्षिप्त चर्चा की गई है, जिसमें ‘शब्द स्थान की दृष्टि से’ और ‘शब्द प्रयोग की दृष्टि से’ इसके रूपों का परिचय दिया गया है। इसके पश्चात ‘पदबंध’ और ‘वाक्य’ स्तर पर नियमों की आवश्यकता की ओर संकेत किया गया है। शोधपत्र के केंद्रीय भाग में ‘हिंदी व्याकरण जाँचक विकास में आने वाली ‘संज्ञा‌+संज्ञा’ समस्याओं’ की चर्चा की गई है तथा उसके बाद कुछ ‘संज्ञा+संज्ञा’ साँचों को आर्थी वर्गीकरण के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिनके आधार पर उन्हें एक ही पदबंध के अंग में मशीन द्वारा स्वचलित रूप से पहचाना जा सके।
Pages: 74-78  |  259 Views  38 Downloads
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