International Journal of Hindi Research

International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 5, Issue 5 (2019)

जनसरोकार के कवि नागार्जुन

Author(s): डॉ. वंदना बिंदलेश
Abstract: नागार्जुन की लेखन सामग्री अत्यंत विपुल है। अपने रचना-संसार में नागार्जुन ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को आधार बनाकर रचना की है। ऐसा लगता है कि इन्होंने जनमानस को सूक्ष्मता से देखा है। जनसाधारण के जीवन के दुख, उत्तेजना, घृणा, क्रोध,कमजोरियाँ, शोषण इत्यादि के साथ ही उनकी खुशियाँ, प्रेम, राग, सौन्दर्य, वात्सल्य को भी इन्होंने आधार बनाया है। इसके अतिरिक्त किसान जीवन से भी ये बराबर जुड़े रहे हैं। किसानों के जीवन से जुड़ी कविताएं अप्रतिम हैं। उनका सौन्दर्य और सरलता मन मोह लेते हैं। राजनीतिक कविताएं विभिन्न राजनीतिक आंदोलनों से जुड़ी हुई हैं और पाठक के मस्तिष्क को झकझोर देती हैं। इनकी कविताओं विषय वैविध्य प्रचुरता से दिखाई देता है। नागार्जुन हिंदी के साथ-साथ संस्कृत, बांग्ला और मैथिली भाषा के भी विद्वान थे इसलिए भाषागत वैविध्य भी इनके लेखन में उभरकर आता है। मुक्तछंद के साथ ही छंदबद्ध कविता करने के कारण शिल्प की दृष्टि से भी कविताएं विशिष्ट व सुंदर बन जाती हैं। विभिन्न स्थानों पर भ्रमण करने व उससे मिलने वाले अनेक अनुभवों की वजह से रचना के मूड व शिल्प में विविधता दिखाई देती है। कहा जा सकता है कि आजादी के बाद का जीवन, चाहे वह शहरी हो अथवा ग्रामीण, राजनीतिक हो या सामाजिक नागार्जुन के लेखन में अपने सम्पूर्ण रूप में उभरकर पाठक को अचंभित कर देता हैं।
Pages: 64-68  |  160 Views  45 Downloads
publish book online
library subscription
Journals List Click Here Research Journals Research Journals
Please use another browser.