International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 5, Issue 6 (2019)

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अनुवाद की भूमिका

Author(s): युगल किशोर यादव
Abstract: भाषा वह माध्यम है जिसके द्वारा मनुष्य अपनी भावनाओं एवं विचारों को प्रकट करता है। लेकिन समस्या तब आन खड़ी होती है जब सामने वाला व्यक्ति हमारी भाषा को नहीं समझ पाता है। ऐसे में किसी तीसरे व्यक्ति की जरूरत पड़ती है जो दो अलग अलग भाषाएँ जानने वाले लोगों के बीच सेतु का काम करता है। ऐसा व्यक्ति दोनों भाषाओं का जानकार होता है जो बारी-बारी से दो अलग अलग भाषाएँ जानने वाले लोगों की बातों को सुनता है और उसका अनुवाद कर उन्हें बताता है। अनुवादकहने से हमारा अभिप्राय एक भाषा में जो बात लिखी व कही गयी है उसके मूलभाव की रक्षा करते हुए दुसरी भाषा में प्रकट करना होता है। वर्तमान समय में अनुवाद की प्रासंगिकता काफी बढ़ चुकी है। अनुवाद विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध साहित्य एवं संस्कृति के ज्ञान से हमें परिचित करवाती है। विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध उत्कृष्ट साहित्य के मर्म को समझने में अनुवाद सहायक होता है। अनुवाद द्वारा ही किसी क्षेत्र विशेष के साहित्य एवं साहित्यकारों को आज हिंदी साहित्य में प्रतिष्ठा मिल पायी हैं। आज विज्ञान के इस उन्नत युग में भाषा, साहित्य, संस्कृति, दर्शन, ज्ञान-विज्ञान के किसी भी स्तर पर देखा जाए अनुवाद की भूमिका सिद्ध होती हुई दिखलाई दे रही है। आज अनुवाद अपने मौखिक एवं लिखित, दोनों रूपों में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
Pages: 01-03  |  276 Views  135 Downloads
library subscription