International Journal of Hindi Research

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ISSN: 2455-2232

Vol. 6, Issue 1 (2020)

राष्ट्रभाषा-प्रहरी नृपेन्द्र नाथ गुप्त की दृष्टि में हिन्दी भाषा एवं संस्कृति की अस्मिता

Author(s): डाॅ॰ पुलकित कुमार मण्डल
Abstract: भाषा, किसी भी स्थान (क्षेत्र) विशेष के ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक गुणों की वाहिका होती है। भाषा, व्यक्ति-विशेष की व्यक्तिगत रूचियों, प्रवृत्तियों एवं सोच की प्रदर्शिका होती है। किसी भी भाषा की मौलिकता की रक्षा उस भाषा के प्राचीन रूप में रचित ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक साहित्य द्वारा होती है। समाज की संस्कृति में परिवर्तन होने के साथ ही भाषा में भी परिवर्तन होने लगता है। किसी भी समाज या राष्ट्र की एक प्रतिनिधि भाषा होती है, जो अपने ेसमय से वर्तमान तक ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक चेतना का संवहन करती है।
Pages: 72-73  |  81 Views  27 Downloads
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