International Journal of Hindi Research

International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 6, Issue 1 (2020)

पर्यावरणीय संकट एवं मानव विकास

Author(s): विवेक कुमार पाण्डेय
Abstract: आज पृथ्वी का अंधाधुंध दोहन इस कदर बढ़ गया है कि मानव जीवन ही संकट के दलदल में फँस गया है । सभ्यता एवं संस्कृति के विकास के साथ मानव ने औद्योगिक क्षेत्र में भी खासी प्रगति की है । इसके लिए मानव ने प्रकृति पर नियंत्रण करना प्रारंभ किया, उसे अपना नियंता समझने के बजाय दास समझने लगा । जीवन को ज्यादा-से-ज्यादा आरामतलब बनाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का ज्यादा-से-ज्यादा दोहन किया जाने लगा । उसकी विलासितापूर्ण जीवनशैली ने प्राकृतिक हवा, पानी, मिट्टी आदि को दूषित कर दिया है, परिणामस्वरूप मानव जीवन संकट के बादल छाने लगे । मनुष्य अपनी जरूरत के हिसाब से नहीं, बल्कि उपभोक्तावादी संस्कृति, बाजारवादी अर्थव्यवस्था, नव-उदारवादी संस्कृति की चपेट में आकर प्रकृति के दोहन में जुटा हुआ है । इसी संस्कृति के परिणामस्वरूप औद्योगिकीकरण, मशीनीकरण की शुरुआत होती है, जो प्रकृति में असंतुलन को जन्म दे रही है । आज हम प्रकृति के साथ लुटेरे जैसा व्यवहार कर रहें हैं, जैसे वह कोई पराई वस्तु हो । परन्तु इसके परिणाम कितने भयावह होंगे इसका अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है, शायद इंसान का ध्यान उस तरफ कम जा रहा है ।
Pages: 80-82  |  119 Views  57 Downloads
publish book online
library subscription
Journals List Click Here Research Journals Research Journals
Please use another browser.