International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 5 (2020)

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रत्याहार की उपादेयताः एक अध्ययन


जसबीर, ज्योति शर्मा

आज के समय मैं अधिकतम मनुष्य क्रोधित और चिड़चिडे़ होते जा रहे है। छोटी -छोटी बातो पर तुरंत क्रोधित हो जाते हैं ओर अपना धैर्य, मानसिक स्थिरता, व्यवहार खो देते हैं। जो समाज के लिए अहितकर है, जिससे प्रतिदिन अपराध बढ़ रहे हैं, इन सबका कारण यह है कि मनुष्यो का अपनी इंद्रियों पर कोई नियंत्रण नहीं है वे राग द्वेष से भरे रहते हैं जिसके कारण शारीरिक - मानसिक रोग उत्पन्न होते है अपने क्रोधित चिड़चिडे़ व्यवहार के कारण अपने परिवार आस - पड़ोस के साथ अच्छा संबंध नही रख पाते है।
मानव सामाजिक प्राणी है इसका कर्तव्य है, वह समाज में कुशल व्यवस्था बनाए रखे । अपने हित के साथ समाज के हित की भी सोचे लेकिन मनुष्य नाम पहचान पैसे कमाने के पीछे भाग रहा है । उसका अपनी इंद्रियों पर कोई नियंत्रण नहीं हैं। उसकी इन्द्रियां बाहर की दुनिया की चमक चांदनी में लगी है वह भी चमक चांदनी जैसी जिंदगी जीना चाहता है। लेकिन वह भूल गया कि यह जीवन का सत्य नहीं है, वह जिस सुख की और जा रहा है, वह थोड़े समय के लिए है। लेकिन वह समझता नहीं है बिना आवश्यकता के ऐश्वर्य देने वाले साजो सामान को एकत्रित किए जा रहा है। जो बाद में उसको दुःख ही प्रदान करेंगें परिणामस्वरूप वह मनुष्य शारीरिक मानसिक रोगों जैसे तनाव अवसाद क्रोध जैसी व्याधियों से ग्रसित होता जा रहा है।
इन सभी परेशानियों को रोकने के लिए आज केे समय में प्रत्याहार का अभ्यास आवश्यक है। जिससे धैर्य, स्थिरता, समझ, इन्द्रियों पर नियत्रण प्राप्त होगा। मेरे लिए क्या सही है, क्या गलत है, मुझे किस चीच की जरूरत है ओर कितनी मात्रा में आवश्यकता है उसका ज्ञान होगा फिर वह सोच विचार करके तकनीकी साधनों का आवश्यकता अनुसार इस्तेमाल करें। तकनीक के मायाजाल से उत्पन्न दुष्प्रभावों से बचे रहें। प्रत्याहार इन्द्रियों को अंर्तमुखी बनाता है प्रत्याहार का अभ्यास हमारे आध्यात्मिक स्तर को बढ़ाता हंै। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, आध्यात्मिक स्वास्थ्य प्राप्त होता हंै।
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