International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 5 (2020)

युग निर्माता आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदीः एक जीवन परिचय


अनुभा कुमारी

महावीर प्रसाद द्विवेदीजी का नाम हिन्दी, भाषा, साहित्य तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में अनुपम तथा अद्वितीय है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के पश्चात् अगर किसी व्यक्ति से विशेष रूप से हिन्दी भाषा, साहित्य तथा पत्रकारिता को मार्गदर्शन मिला है, तो उसमें महावीर प्रसाद द्विवेदी जी का नाम आदर से लिया जाता है। हिन्दी-पत्रकारिता को उन्होंने उँचाई तथा श्रेष्ठता प्रदान की है। भाषा-संशोधन, परिष्कार, शुद्धता तथा व्याकरण का ध्यान इनका मूल है। हिन्दी पत्रकारिता को श्रेष्ठता तथा दिव्यता प्रदान करने के कारण इन्होंने अपने कार्यकाल को अधिकाधिक प्रभावित किया। इसी कारण हिन्दी सेवा की इस अवधि को ‘द्विवेदी युग’ कहा जाता है। ‘भारतेन्दु युग’ और ‘द्विवेदी युग’ हिन्दी साहित्य के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हैं। 1903 ईÛ में वे ‘सरस्वती’ के संपादक हुए और 1920 ईÛ तक वे उसका संपादन करते रहे। इन दो दशकों में उन्होंने जो कुछ किया। उसी के बल पर इस युग को ‘द्विवेदी युग’ की संज्ञा दी गई। ‘‘आपके संपादन में जहाँ ‘सरस्वती’ की बहुमुखी उन्नति हुई, वहाँ आपके द्वारा हिन्दी-साहित्य के उत्कर्ष का नया अध्याय भी प्रारंभ हुआ। आपने अपनी कर्मठता से यह सिद्ध करके दिखा दिया कि एक पुरूष अपने ही उद्योग से विद्वता प्राप्त करके साहित्य-निर्माण की दिशा में उन्नति के शिखर पर किस प्रकार प्रतिष्ठित हो सकता है।
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदीजी वास्तव में हिन्दी भाषा और पत्रकारिता जगत के ‘महावीर’ हैं। हिन्दी भाषा और पत्रकारिता के क्षेत्र में जो अमूल्य काम वे कर गए हैं, वह उनका ‘अमूल्य प्रसाद’ ही है। हिन्दी भाषा-भाषी लोग आज उस ‘महावीर’ के ‘अमूल्य प्रसाद’ को ग्रहण करके तृप्त हो रहे हैं। आचार्य द्विवेदी जी ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से अनेक कवियों, साहित्यकारों और पत्रकारों का निर्माण किया। इन कवियों के निर्माण के कारण हिन्दी-काव्य या कविता का भंडार भर गया। इन साहित्यकारों के निर्माण के कारण हिन्दी-साहित्य का भण्डार समृद्ध हुआ। यह काम अप्रत्यक्ष रूप से होता रहा है। जिन साहित्यकारों का उन्होंने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से निर्माण किया है उन साहित्यकारों ने हिन्दी-साहित्य को उत्कृष्टतम कृतियों से सुसज्जित किया।
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