International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 5 (2020)

समकालीन हिंदी प्रवासी साहित्य


विजयश्री सातपालकर

वर्तमान दौर ने हिंदी साहित्य ने देश की सीमाएँ लांघकर अंतर्राष्ट्रीय सरोकार स्थापित कर दिए हैं। हिंदी साहित्य को अधिक समृद्ध बनाने के लिए भारतियों के साथ प्रवासी रचनाकार भी अपनी लेखनी चला रहे हैं। प्रवासी साहित्य में प्रवासियों का जीवन परिलक्षित होता है। समकालीन दौर में प्रवासी रचनाकारों के साथ रचनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है। देश प्रेम से ओतप्रोत प्रवासी हिंदी साहित्यकार दूसरे देश में वास कर हिंदी भाषा को समृद्ध बनाने के लिए अपना भरकस योगदान दे रहे हैं। भारत में भी प्रवासी साहित्यकारों को सम्मान और प्रेम दिया जा रहा है।
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