International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 5 (2020)

‘मगध-महिमा’ के इतिहास-बोध का महत्व


आराधना साव

इतिहास केवल अतीत का ज्ञान नहीं होता है और न ही हमारी गलतियों का केवल एक आईना, बल्कि इतिहास किसी देश या किसी व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व और अस्तित्व के आकलन का एक महत्वपूर्ण आधार होता है । इसी आधार पर खड़े होकर एक देश या व्यक्ति अपने भविष्य की ओर आगे बढ़ता है । यह आधार अगर गौरवमयी है तो वह गौरवबोध के साथ स्वर्णिम भविष्य का स्वप्न देखता है और उसी पथ पर आगे बढ़ता है लेकिन यही आधार अगर निराशाजनक हो तो वह धीरे-धीरे हीनताबोध में जकड़ता चला जाता है और एक स्वर्णिम भविष्य के निर्माण करने की उसकी क्षमता क्षीण होती जाती है । इसलिए ‘मगध-महिमा’ द्वारा दिनकर जी ने मगध के गौरवमयी इतिहास को स्मरण किया है । निसंदेह उनका मकसद केवल मगध के इतिहास का गुणगान करना नहीं रहा होगा बल्कि पाठकों को कर्मपथ पर प्रेरित करना भी रहा होगा, इस शोध पत्र में मैंने इसी बात की पड़ताल की है और ‘मगध-महिमा’ के इतिहास-बोध के महत्व को समझने का प्रयास किया है ।
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