International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 5 (2020)

प्रेमचन्द के उपन्यासों में स्त्री अस्मिता के प्रश्न


चन्दीर पासवान

हिन्दी कथासाहित्य के क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे प्रेमचन्द नाम पता न हो वैसे प्रेमचन्द से भारत का बच्चा-बच्चा परिचित है और हो भी न क्यों न वे अपने रचना का अधार गाँव-समाज में रह रहे सभी वर्गों के लोगों को अपने रचना का विषय बनाया है। प्रेमचन्द युग-प्रवर्तक रचनाकार है। उनकी रचनाओं में तत्कालीन समाज का दर्शन है। वे साहित्य के उद्देश्य परक मानते थे।
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