International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 5 (2020)

शैक्षिक अवसरों में समानता एंव निकोबारी आदिवासी समाज


विनीता सिंह गोपालकृष्णन, कु0 राखी

भारत के केन्द्र षासित राज्यों में अण्डमान निकोबार राज्य अत्यन्त रोचक है। यह राज्य लगभग 200 सालो तक ब्रिटिश राज में रहा। ब्रिटिष राज में सरकार विद्रोहियों एंव खतरनाक कैदियों को यहाँ की जेल में भेजती थी। भारतीयों के लिए यह स्थान कालापानी के नाम से प्रसिद्ध थी। अण्डमान निकोबार द्वीप में 572 द्वीप है जिनमें 37 द्वीप पर ही जनसंख्या है, बाकी द्वीप खाली पडे है। इन द्वीपों पर रहने वाले आदिवासी हमेशा चर्चा का विषय रहते है। इन आदिवासी समुदायों में जारवा एंव निकोबारी अधिक चर्चित है। यह आदिवासी समाज बाहरी लोगों के संपर्क में आने लगे है अतः भारतीय सरकार के संरक्षण में इन आदिवासीयों को शिक्षा दीक्षा प्रदान की जा रही है। इन आदिवासीयों में निकोबारी आदिवासीयों को अधिक विकसित माना जाता है।
निकोबारी भारत की एक प्रमुख जनजाति है। यह जनजाति अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में रहते है। जिसमें यह समूह मुख्य रुप से निकोबार द्वीप में रहते है। निकोबार में निवास करने वाले स्त्री एंव पुरुषों का सामाजिक स्तर लगभग समान होता है। निकोबारी समाज में एक मुखिया होता है जिसे रानी की उपाधि प्राप्त रहती है। यहाँ निवास करने वालें लोगो का आवास स्थान खम्बों पर उठे हुए झोपडों पर होता है। ये जनजाति इन आवासों में सीढियों की मदद से चढते है। इन आवासों की एक बस्ती बनायी जाती है जिसमें ये निवासी निवास करते है। ये समुदाय अलग-अलग प्रकार की निकोबारी भाषाएँ बोलते है। ‘कार निकोबारी’ भाषा यहाँ की मातृभाषा है। अतः विद्यालयों के अंतर्गत हिन्दी भाषा को मातृभाषा के रुप में मान्यता प्राप्त है। अतः शिक्षा के क्षेत्र में हिन्दी भाषा को मुख्य स्थान प्राप्त है। निकोबारी समुदाय अब शिक्षा के क्षेत्र में बढचढकर हिस्सा लेने लगे है ये समूह अब आत्मनिर्भर है। आदिवासी समूह सभी क्षेत्रों में अपना योगदान दे रहे है। शिक्षा पर राष्ट्रीय नीति के उद्देष्य 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को निःशुल्क एंव शिक्षा प्रदान की जाती है।
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