International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 5 (2020)

जयशंकर प्रसाद के काव्य में राष्ट्र जागरण के स्वर


कुमारी वाग्वी, प्रिंस कुमार

छायावादी कविताओं का कालखंड ठीक उस समय का है जब देश में राष्ट्रीय आंदोलन का दौर चल रहा था । इस आंदोलन के नेतृत्वकर्ता थे - गाँधी, नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद आदि। यद्यपि साहित्य में प्रायः तत्कालीन समाज की अभिव्यक्ति होती है तथापि यह दुर्भाग्य का ही विषय था कि छायावादी कवियों एवं रचनाकारों पर पलायनवादिता के गंभीर आरोप लगाए गए। यह सत्य है कि छायावादी कविताओं में वायवीय कल्पनाओं का चित्रण हुआ है परंतु इन कविताओं का जब हम तत्कालीन परिवेश को आधार बनाकर एवं सूक्ष्म दृष्टि से अध्ययन करते हैं तो इन कविताओं में राष्ट्रीय जागरण का जो स्वर देखने को मिलता है वह अपने आप में अद्वितीय हैं। छायावादी कवियों में सबसे प्रमुख एवं वरिष्ठ कवि हैं जयशंकर प्रसाद। अतः उनपर यह जिम्मेदारी और भी अधिक थी जिससे यह कहा जा सके कि छायावादी कवियों की रचनाएँ भी राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत थी एवं तत्कालीन संघर्ष में साहित्यकारों का भी सहयोग आंदोलनकारियों तथा स्वतंत्रता के आकांक्षियों को मिल रहा था।
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