International Journal of Hindi Research

International Journal of Hindi Research


International Journal of Hindi Research
International Journal of Hindi Research
Vol. 6, Issue 5 (2020)

साहित्य में स्त्री-पुरूष संबंध (आधार ग्रंथ - ‘कामायनी‘)


भावना पाण्डेय

हमारा अन्तर्जीवन और उसका क्रम अपने बाहृा परिवेश और परिस्थिति से आवयविक सम्बन्ध रखता है, और दोनों - अन्तर तथा बाहृा- अंगांगिभाव से एकीभूत होकर हमारा जीवन बनाते हैं। और इसी अन्तर का निर्वहन स्त्री और पुरूष करता है। समाज रेत का वह ढेर नहीं जिसमें का प्रत्येक कण एक-दूसरे से घनिष्ठ सम्पर्क रखते हुए भी एक- दूसरे से विलग और स्वतन्त्र रहता है। समाज एक वृक्ष की भाँति है, जिसका प्रत्येक भाग, प्रत्येक अंश, प्रत्येक कण और प्रत्येक बिन्दु एक-दूसरे से और अपने पूर्ण अखण्ड से आवयविक सम्बन्ध रखता है। स्त्री-पुरूष का सम्बध इसी वृक्ष की भांति है जो एक दूसरे को छाया देती है। मानव-चेतना की प्रक्रियाएँ प्राणिशास्त्रीय आधार पर खड़ी होते हुए भी, मूलतः मनोवैज्ञानिक हैं, अर्थात् चेतना की प्रक्रियाओं के अन्र्तनियम प्राणिशास्त्रीय आधार पर स्थित होते हुए भी उससे भिन्न हैं। किन्तु चेतना के तत्व बाहा के आभ्यन्तरीकृत रूप हैं।
Pages : 94-96 | 266 Views | 74 Downloads