International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 5 (2020)

हठयौगिक ग्रंथों में प्रत्याहार का स्वरूप


ज्योति शर्मा, प्रो. गणेश शंकर गिरि

योग की अनेक साधनाएं है जिनमें हठयोग का भी वर्णन मिलता हंै। जो हमें स्थूल से सूक्ष्म की ओर ले जाती है। हठयोग दो शब्दों से मिलकर बना है। ह और ठ। जिसको पिंगला और इडा़ भी कहा जाता हैं नाथ योगियो के अनुसार प्राण का प्रवाह इडा़ और पिंगला में होता है जिसका उद्देश्य है हठयोग के ग्रन्थों में वर्णित आसन, कुम्भक, मुद्रा एवं बंध, ध्यान, प्रत्याहार, धारणा के अभ्यास से प्राण का सुषाुम्ना में प्रवाह करके कुण्डलिनी को जागृत करना है। आधुनिक समय में अधिकतम मनुष्य तनाव से ग्रसत और चिड़चिडे होते जा रहे है छोटी -छोटी बातो पर तुरंत तनाव में चले जाते है और अपना धैर्य मानसिक स्थिरता व्यवहार पर नियंत्रण नहीं कर पाते है जो समाज के लिए अहितकर है जिससे प्रतिदिन अपराध बढ़ रहे है इन सबका कारण यह है कि मनुष्यो का अपनी इंिन्द्रयो पर कोई नियंत्रण नही है वे राग द्धेष से भरे रहते है जिसके कारण शारीरिक -मानमिक रोग उत्पन्न होते है अपने क्रोधित चिड़चिडे व्यवहार के कारण अपने परिवार आस - पाडोस के साथ अच्छा संबंध नही रख पाते है। हम समाजिक प्राणि है हमारा कर्तव्य है हम समाज मे कुशल व्यवस्था बनाए रखे। अपने हित के साथ समाज के हित की भी सोचे लेकिन मनुष्य नाम, पहचान पैसे कमाने के पीछे भाग रहा है उसका अपनी इन्द्रियो पर कोई नियंत्रण नही है उसकी इन्द्रिया बाहर की दुनिया की चमक चांदनी मे लगी है वह भी चमक चांदनी जैसी जिंदगी जीना चाहता है लेकिन वह भुल गया कि यह जीवन का सत्य नही है वह जिस सुख की और जा रहा है वह थोडे समय के लिए है लेकिन वह समझता नही है बिना आवश्यकता के ऐश्वर्य देने वाले साजो सामन को एकत्रित किए जा रहा है।े।जो बाद मे उसको दुःख ही प्रदान करेंगें परिणामस्वरूप वह मनुष्य शरीरिक मानसिक रोगों जैसे तनाव अवसाद का्रेध जैसी व्याधियो से ग्रसित होता जा रहा है।
इन सब परेशनियो को रोकने के लिए आज केे समय मे प्रत्याहार का अभ्यास आवश्यक है जिससे घैर्य,स्थिरता, समझ,इन्द्रियो पर नियत्रण प्राप्त होगा।मेरे लिए क्या सही है क्या गलत है मुझे किस चीच की जरूरत कितनी है और उसे समझ बनेगी कि तकनीकी साधनो का आवश्यकता अनुसार इस्तेमाल करें। तकनीक के मायाजाल से उत्पन्न दुष्प्रभावों से बचे रहें। प्रत्याहार इन्द्रियो को अंर्तमुखी करता है प्रत्याहार का अभ्यास हमारे आध्यात्मिक स्तर को बढ़ाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा शारीरिक,मानसिक,समाजिक,आध्यात्मिक स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
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