International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 5 (2020)

बेनीपुरी जी के संस्मरणों का कथ्यगत विश्लेषण


रीना यादव

रामवृक्ष बेनीपुरी जी का कथा-क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है। इस व्यापक क्षेत्र में गाँव की कच्ची-पक्की, पगडंडियाँ भी है तो शहरों की भव्य अट्टालिकाएँ भी हैं। मूलरूप से ग्रामगंधी वस्तुओं ने उन्हें अधिक लोप्रियता प्रदान की है। उनका अपना जीवन इतने कठोर झंझावातों, संघर्षों, आत्मबलिदानों एवं आंदोलनों से जूझा है कि उनकी लेखनी जब ज्वालामुखीय लावा उगलती है तब पाठक समुदाय का हृदय भी अंगारों की दग्धता से आतप्त हो उठता है, वहीं दूसरी ओर अपने संस्मण्र्यों के श्रीचरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित करते समय वे इतने भावुक हो उठते हैं कि पाठकों में करूणा का उद्रेक उमड़ पड़ता है। अतः उनकी लेखनी के हर मोड़ में पाठकों को उद्वेलित करने की अमोध शक्ति है। सूक्ष्म से विराट तक का उनका कथ्य सफर एक सफल यात्रा है जिससे गाँव-घर की झोपड़ियों का हास्य-रूदन है, विदेषी गलियारों की भव्य शानों-षौकत है, अपने आराध्य संस्मण्र्यों के जीवन के हँसते-गाते रूहानी पल है, जेल-जीवन की नारकीय यातनाएँ है, राजनीति के तिक्त-मधुर अनुभव है, पत्रकारिता के गौरवमयी क्षण है, स्वयं उनकी अपनी जीवनगाथा भी है। इतने व्यापक क्षेत्र पर ऐसी मजबूत पकड़ रामवृक्ष बेनीपुरी जी जैसे किसी कालजयी रचनाकार की ही हो सकती है।
Pages : 148-152 | 850 Views | 673 Downloads