International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 5 (2020)

उत्तराखण्ड का आंचलिक इतिहास एवं संस्कृति


डाॅ. सुनीता कुमारी

उत्तराखण्ड एक पर्वतीय राज्य है। यहां का लगभग 88 प्रतिशत भूभाग पर्वतीय है जबकि तराई एवं भावर का क्षेत्र महज 12 प्रतिशत है। यूॅ तो नवीन राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आये इस अंचल को अधिक समय नहीं हुआ है, लेकिन यदि इस अंचल की संस्कृति की बात करें तो यह अत्यन्त प्राचीन काल से ही विश्व आकर्षण का केन्द्र रही है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण स्वरूप अंचल की सांस्कृतिक विविधता एवं ऐतिहासिक गौरव गाथा का उल्लेख अनेक साहित्यों एवं ऐतिहासिक ग्रंथों में देखने को मिलता है। आंचलिक रचनात्मकता न केवल समस्याओं के वास्तविक स्वरूप को समझने में मददगार है बल्कि वह इनके सर्वोत्तम संभावित समाधानों की दिशा का अचूक संकेत भी देती है। यही कारण है कि आज ऐतिहासिक, आर्थिक, राजनीतिक और समाजशास्त्रीय विचार-परंपरा के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में भी आंचलिक दृष्टिकोण की आवश्यकता असंदिग्ध है। इतना ही नही इस अंचल का पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किया गया कार्य क्षेत्रीय ही नहीं वरन राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावी पहल करने के लिए जाना जाता है। इस प्रकार के कार्य अंचल को एक पृथक सांस्कृतिक पहचान दिलाने का कार्य करती है। लेकिन आज जबकि संचार के क्षेत्र में बढ़ते तकनीकी प्रयोग ने सामाजिक संरचना में व्यापक परिवर्तन ला दिया है, का प्रभाव अंचल की संस्कृति पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। बढ़ते पर्यटन व्यवसाय तथा भौतिकवादी चकाचैंध ने अंचल की सांस्कृतिक विरासत की नींव कमजोर किया है, जो आज समाज में उत्पन्न विविध समस्याओं का कारण साबित हो रही है। यही कारण है कि वर्तमान समय में अंचल के ऐतिहासिक स्वरूप का अध्ययन करना तथा इसकी सांस्कृतिक विरासत पर दृष्टि डालना समय की मांग बन गयी है। विषय के इन्हीं महत्व के कारण प्रस्तुत शोध पत्र हेतु प्रस्तुत विषय का चयन किया गया है। यह अध्ययन मूल रूप से अंचल के विविध मुद्दों एवं विषयों के अंतर्गत रचित विभिन्न साहित्यों पर केन्द्रित है।
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