International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 6 (2020)

मृदुला सिन्हा के उपन्यासों में नारी की पारिवारिक स्थिति


डॉ. लोकेन्द्र कुमार, श्रीमती उर्मिला देवी पाटीदार

परिवारसमाजकीप्राथमिकसंस्थाओंमेंसबसेअधिकमहत्वपूर्णसंस्थाहैअर्थातपरिवारकोप्रथमपाठशालातथामाताकोप्रथमगुरुकहागयाहैं I माताहीसंतानकेउन्नतिरूपीवृक्षकोअपनेसंस्कारोंसेसींचतीहै I नारीपरिवारकाआधारहोतीहै I नारीहीवहधुरीहैजिसपरपरिवारटिकारहताहैं Iहिंदीकेसंपन्नमहिलारचनाकारोंमेंमृदुलासिन्हाकानामअत्यधिकप्रभावशालीहै I इनकारचनास्थलसिर्फस्त्रीजीवनहीनहींअपितुस्त्रीस्वातंत्र्य, स्त्रीअस्मिता, स्त्रीशोषणइत्यादिविषयोंमेंमात्रसीमितनरहकरसांस्कृतिक, ऐतिहासिक, पारिवारिक, राजनैतिक, पारिस्थितिकीएवम्धार्मिकपरिवेशकोभीगंभीरतासेलियाहै I उन्होंनेस्त्रीकोपरिवारकाआधारस्तम्भबतायाहै I वेभारतीयपरिवारव्यवस्थामेंविश्वासकरतीहैऔरकहतीहै “स्त्रीसशक्तीकरण, पुरुषसशक्तीकरण, बच्चासशक्तीकरणऔरवृद्धसशक्तीकरणनहींपरिवारसशक्तीकरणकेउपायढूंढनेचाहिए I ”परिवारमेंस्त्रीदोहरीभूमिकानिभारहीहै I वहमाँ, पत्नी, बहूआदिकीभूमिकाकेसाथ – साथबेटीवबहनआदिकेस्थानपरभीहैं I पुरानीपरम्पराओंकेअनुसारउसेपुरुषपरहीआश्रितरहनापड़ताथा I वहबचपनमेंपितायुवावस्थामेंपतितथावृद्धावस्थामेंपुत्रोंपरआश्रितरहेगीऔरइसप्रकारवहकभीस्वावलंबीनहींबनसकी I
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