International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 6 (2020)

श्यौराज की कहानियों में सामाजिक-यथार्थ


प्रियंका कुमारी

डाॅ. श्यौराज सिंह ‘बेचैन’ प्रसिद्ध दलित विचारक और साहित्यकार है। दलित क्रांति का साहित्य, कौन्च हूँ मैं, नई फसल, अन्याय कोई परम्परा नहीं मूल खोजो विवाद निपटेगा आदि इनकी चर्चित रचनाएँ हैंै। क्रौन्च हूँ मैं और नई फसल इनकी काव्य रचनाएँ हैं। इनकी दलित विषय पर ‘रावण’ कहानी हंस में छपकर चर्चित हुई थी। उन्होंने कहानी के माध्यम से समाज में सबसे नीचले दर्जे में रहने वाले अछूतों का वर्णन किया है। जिसे सामाजिक स्तर पर सम्मान नहीं मिलता है। उनकी छटपटाहट ही शब्दबद्ध होकर दलित-साहित्य बन रही है। उनकी कहानी संग्रह-‘भरोसे की बहन’ काफी चर्चित हुई है। जिसमें दलित स्त्रीयों को केन्द्र मानकर अनेक कहानियाँ लिखें हैं। इन कहानीयों में मुख्यतः समसामयिक समस्याओं, मुद्दों और सामाजिक सरोकारों को व्यक्त किया गया है। शोध-प्रबंध नामक कहानी में दलित-षोध-छात्रा के साथ सवर्ण शोध निर्देषक कितनी घृर्णित मानसिकता से उसका शोषण करते है, इसका यथार्थ चित्रण पाया जाता है। साथ ही साथ ‘कथा करे लड़की भरोसे की बहन’ तथा ‘षीतल के सपने’ इत्यादि कहानियों के माध्यम से लेखक ने दलित स्त्री-विमर्ष को प्रमुख रूप से वर्णन किया है। ‘‘भारतीय साहित्य में दलित जीवन सम्बन्धी ज्वलन्त सवालों को ठंडे दिमाग से आकदमिक ढ़ग से सामने लाता है। सामाजिक न्याय का साहित्य के क्षेत्र में प्रस्तुतीकरण को चित्रित करता है।’’ 1,
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