International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 6 (2020)

नेपाली मुक्तिसंग्राम (1950 -1951) में रेणु की भूमिका संदर्भ: रेणु के रिपोर्ताज ‘नेपाली क्रांति कथा’ से


तुलसी छेत्री

रेणु के लेखन का स्वरूप भारतीय ही नहीं बल्कि वैश्विक भी था। नेपाल पर उनके लिखे हुए रिपोर्ताज़ "नेपाली क्रांति कथा" से इस बात को बखूबी समझा जा सकता है। नेपाल के साथ रेणु का संबंध घनिष्ठता का है। रेणु का नाम नेपाल के राजनीतिक और साहित्यिक दोनों क्षेत्रों में अविस्मरणीय हैं। राजनीति से साहित्य और साहित्य से फिर राजनीति की ओर चहलकदमी करते हुए रेणु का मकसद मात्र लोकतान्त्रिक सरकार का समर्थन करना नहीं था। सही मायने में वे भारत और नेपाल की जनता को स्वतंत्र बनाना चाहते थे। रेणु की कलम ने ‘विराटनगर मिल आंदोलन’ को जन्म दिया और मुक्ति सेना के प्रचारक रेणु ने नेपाली क्रांति को। रिपोर्ताज शैली में लिखी गई अपनी पुस्तक ‘नेपाली क्रांति-कथा’ में रेणु ने राणाशाही के विरुद्ध संघर्ष का आंखों देखा विवरण कर उस मुक्ति-संग्राम को जीवंत कर दिया है।
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