International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 6 (2020)

हिंदी बाल साहित्य : एक अवलोकन


अश्विनी के

पुराने समय में कहानी एक व्यक्ति सुनता था और उसे विभिन्न वर्गों के श्रोतागण विभिन्न रूपों में ग्रहण करते थे । बड़े लोग इन्हें जीवन के अनुभव के रंगो में रंगकर सुनते थे । युवा श्रोतावर्ग इन अनुभवों को कार्यरूप देता था । बच्चे इनमें मनोरंजन के साथ-साथ दुनिया की विशालता को भी अनुभव करते थे । प्रत्येक कथा के प्रति बच्चों की एक विशिष्ट दृष्टि हुआ करती थी और उसे वे सबसे पहले अपनी रूचि की कसौटी पर देखा करते थे और जो कहानी खरी उतरती थी, वही सही अर्थों में बाल-मन पर अमिट छाप छोड़ती थी । साहित्य के प्रति बच्चों की इसी विशिष्ट रूचि ने आगे चलकर स्वतंत्र बाल-साहित्य को जन्म दिया
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