International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 6 (2020)

प्रगतिशील काव्यधारा के कवि नागार्जुन


चंद्रलेखा पुरोहित, डाॅ सरला शर्मा

नागार्जुन प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख कवि है। उनकी कविताएँ जीवन के अनेक पक्षों को एक साथ लेकर चलती है। वे एक साधारण, निम्नवर्गीय किसान परिवार से संबंधित थे इसलिए वे किसानों के जीवन संघर्ष से पूर्णतया अवगत थे। वे सही अर्थो में धरती के कवि थे। छायावादी काव्यधारा में यथार्थ से दूर कल्पना लोक में विचरण करने की प्रवृति दिखाई देती है परंतु वही प्रगतिशील कवि यथार्थ से गहनता से जुडाव रखने वाले थे। उनके काव्य में मजदूरों के प्रति सहानुभूति एवं शोषकों के प्रति घृणा स्पष्ट व्यक्त हुई है। नागार्जुन एक ऐसे कवि थे जिनकी कविताओं में हमें हृदय की सच्ची टिस,वेदना और सहानुभूति की अनुभूति होती है। उन पर मार्क्सवादी और कम्यूनिस्ट आन्दोलन का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने अपनी कलम से जन साधारण की आवाज को मजबूती प्रदान की। तभी उन्हें जनकवि कहा जाता है। उन्होंने अपनी विशिष्ट व्यंग्यात्मक शैली में सामाजिक व्यवस्था के प्रति आक्रोश, अन्याय का विरोध और समकालीन मुद्दों पर बहस आदि विषयों पर अपनी कविताओ में चर्चा प्रस्तुत की।
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